#hanumanjayant श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुर सुधारि. बरनउँ…

#hanumanjayant

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुर सुधारि.
बरनउँ रघबर बिमल जसु जो दायकु फ़ल चारि.

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार.
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस विकार.

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर.
राम दूत अतुलित बल धामा, अंजनी-पुत्र पवन सुत नामा.

महाबीर बिक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी.
कंचन बरन बिराज सुबेसा, कानन कुंडक कुंचित केसा.

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै, काँधे मूँज जनेऊ साजै.
संकर सुमन केसरीनंदन, तेज प्रताप महा जग बंदन.

बिद्यावान गुनी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर.
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया, राम लखन सीता मन बसिया.

सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा, बिकट रुप धरि लंक जरावा.
भीम रुप धरि असुर सँहारे, रामचन्द्र के काज सँवारे.

लाय सजीवन लखन जियाये, श्री रघुबीर हराषि उर लाये.
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई.

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं, अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं.
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा, नारद सारद सहित अहीसा.

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते, कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते.
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा, राम मिलाय राज पद दीन्हा.

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना, लंकेस्वर भए सब जग जाना.
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू , लील्यो ताहि मधुर फ़ल जानू.

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं, जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं.
दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते.

राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसरे.
सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रच्छक काहू को डर ना.

आपन तेज सम्हारो आपै, तीनों लोक हाँक ते काँपै.
भूत पिचास निकट नहिं आवै, महाबीर जब नाम सुनावै.

नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा.
संकट से हनुमान छुड़ावै, मन क्रम बचन ध्यान जो लावै.

सब पर राम तपस्वी राजा, तिन के काज सकल तुम साजा.
और मनोरथ जो कोई लावै, सोइ अमित जीवन फ़ल पावै.

चारों जुग प्रताप तुम्हारा, हे प्रसिद्ध जगत उजियारा.
साधु संत के तुम रखवारे, ससुर निकंदन राम दुलारे.

अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता.
राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के पासा.

तुम्हरे भजन राम को पावै, जनम जनम के दुख बिसरावे.
अंत काल रघुबर पुर जाई, जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई.

और देवता चित्त न धरई, हनुमत से सब सुख करई.
संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरै हनुमंत बलबीरा.

जै जै जै हनुमान गोसाई, कृपा करहु गुरु देव की नाई.
जो सत बार पाठ कर कोई, छूटहि बंदि महा सुख होई.

जो यह पढ़े हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा.
तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ ह्र्दय महँ डेरा.

from Tumblr https://ift.tt/2pRDyfi
via IFTTT

दोहा श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुर सुधारि. बरनउँ रघबर बिमल जसु जो दायकु फ़ल चारि. बुद्धिहीन…

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुर सुधारि.
बरनउँ रघबर बिमल जसु जो दायकु फ़ल चारि.

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार.
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस विकार.

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर.
राम दूत अतुलित बल धामा, अंजनी-पुत्र पवन सुत नामा.

महाबीर बिक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी.
कंचन बरन बिराज सुबेसा, कानन कुंडक कुंचित केसा.

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै, काँधे मूँज जनेऊ साजै.
संकर सुमन केसरीनंदन, तेज प्रताप महा जग बंदन.

बिद्यावान गुनी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर.
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया, राम लखन सीता मन बसिया.

सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा, बिकट रुप धरि लंक जरावा.
भीम रुप धरि असुर सँहारे, रामचन्द्र के काज सँवारे.

लाय सजीवन लखन जियाये, श्री रघुबीर हराषि उर लाये.
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई.

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं, अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं.
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा, नारद सारद सहित अहीसा.

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते, कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते.
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा, राम मिलाय राज पद दीन्हा.

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना, लंकेस्वर भए सब जग जाना.
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू , लील्यो ताहि मधुर फ़ल जानू.

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं, जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं.
दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते.

राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसरे.
सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रच्छक काहू को डर ना.

आपन तेज सम्हारो आपै, तीनों लोक हाँक ते काँपै.
भूत पिचास निकट नहिं आवै, महाबीर जब नाम सुनावै.

नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा.
संकट से हनुमान छुड़ावै, मन क्रम बचन ध्यान जो लावै.

सब पर राम तपस्वी राजा, तिन के काज सकल तुम साजा.
और मनोरथ जो कोई लावै, सोइ अमित जीवन फ़ल पावै.

चारों जुग प्रताप तुम्हारा, हे प्रसिद्ध जगत उजियारा.
साधु संत के तुम रखवारे, ससुर निकंदन राम दुलारे.

अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता.
राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के पासा.

तुम्हरे भजन राम को पावै, जनम जनम के दुख बिसरावे.
अंत काल रघुबर पुर जाई, जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई.

और देवता चित्त न धरई, हनुमत से सब सुख करई.
संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरै हनुमंत बलबीरा.

जै जै जै हनुमान गोसाई, कृपा करहु गुरु देव की नाई.
जो सत बार पाठ कर कोई, छूटहि बंदि महा सुख होई.

जो यह पढ़े हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा.
तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ ह्र्दय महँ डेरा.

दोहा

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप
राम लखन सीता सहित, ह्रदय बसहु सुर भूप

।। इति श्री हनुमान चालीसा समाप्त ।।

from Tumblr https://ift.tt/2E8RJSu
via IFTTT

दोहा श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुर सुधारि. बरनउँ रघबर बिमल जसु जो दायकु फ़ल चारि. बुद्धिहीन…

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुर सुधारि.
बरनउँ रघबर बिमल जसु जो दायकु फ़ल चारि.

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार.
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस विकार.

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर.
राम दूत अतुलित बल धामा, अंजनी-पुत्र पवन सुत नामा.

महाबीर बिक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी.
कंचन बरन बिराज सुबेसा, कानन कुंडक कुंचित केसा.

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै, काँधे मूँज जनेऊ साजै.
संकर सुमन केसरीनंदन, तेज प्रताप महा जग बंदन.

बिद्यावान गुनी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर.
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया, राम लखन सीता मन बसिया.

सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा, बिकट रुप धरि लंक जरावा.
भीम रुप धरि असुर सँहारे, रामचन्द्र के काज सँवारे.

लाय सजीवन लखन जियाये, श्री रघुबीर हराषि उर लाये.
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई.

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं, अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं.
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा, नारद सारद सहित अहीसा.

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते, कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते.
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा, राम मिलाय राज पद दीन्हा.

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना, लंकेस्वर भए सब जग जाना.
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू , लील्यो ताहि मधुर फ़ल जानू.

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं, जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं.
दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते.

राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसरे.
सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रच्छक काहू को डर ना.

आपन तेज सम्हारो आपै, तीनों लोक हाँक ते काँपै.
भूत पिचास निकट नहिं आवै, महाबीर जब नाम सुनावै.

नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा.
संकट से हनुमान छुड़ावै, मन क्रम बचन ध्यान जो लावै.

सब पर राम तपस्वी राजा, तिन के काज सकल तुम साजा.
और मनोरथ जो कोई लावै, सोइ अमित जीवन फ़ल पावै.

चारों जुग प्रताप तुम्हारा, हे प्रसिद्ध जगत उजियारा.
साधु संत के तुम रखवारे, ससुर निकंदन राम दुलारे.

अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता.
राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के पासा.

तुम्हरे भजन राम को पावै, जनम जनम के दुख बिसरावे.
अंत काल रघुबर पुर जाई, जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई.

और देवता चित्त न धरई, हनुमत से सब सुख करई.
संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरै हनुमंत बलबीरा.

जै जै जै हनुमान गोसाई, कृपा करहु गुरु देव की नाई.
जो सत बार पाठ कर कोई, छूटहि बंदि महा सुख होई.

जो यह पढ़े हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा.
तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ ह्र्दय महँ डेरा.

दोहा

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप
राम लखन सीता सहित, ह्रदय बसहु सुर भूप

।। इति श्री हनुमान चालीसा समाप्त ।।

from Tumblr https://ift.tt/2GYAK8h
via IFTTT

सफलता की कहानियाँ

सफलता की कहानियाँ:

गूगल

दुनिया की सबसे बड़े सर्च गूगल ने 2005 में आधिकारिक तौर पर अपना जन्मदिन 27 सितंबर को मनाने की घोषणा की थी। इसके पहले गूगल ने अपने बर्थडे की तारीख कई बार बदली है। 4 सितंबर, 1998 को बनी इस कंपनी ने सितंबर महीने के कई दिनों को अपने बर्थडे के तौर पर चुना था। 4, फिर 7, और 15, व 26 सितंबर के बाद आखिरकार 2005 में गूगल ने 27 सितंबर को अपना जन्मदिन तय कर लिया। 2005 के बाद से हर 27 सितंबर को गूगल अपने होम पेज पर आकर्षक डूडल बनाता आया है। ‘ब्रांड गूगल’ की चमत्कारिक सफलता की कहानी कैलिफोर्निया की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के दो छात्रों के बीच दोस्ती के साथ शुरू हुई। शुरुआत में इन दोस्तों ने गूगल कंपनी एक कार गैराज से शुरू की थी, जो आज बहुत ही अधिक लोकप्रिय बन चुकी है। इंटरनेट सर्च मशीन से शुरू कर गूगल अब ई-मेल, फोटो और वीडियो, भूसर्वेक्षण नक्शों और मोबाइल फोन जैसी सेवाएं देने वाली ऑलराउंडर कंपनी बन गई है। सभी सेवाएं मुफ्त हैं। कमाई होती है व्यावसायिक कंपनियों से मिलने वाले विज्ञापनों से। गूगल की शुरुआत गैराज में बनाए गए ऑफिस से हुई थी। आज गूगल के हेडक्वार्टर ‘गूगलप्लेक्स’ समेत गूगल के 40 देशों में 70 से ज्यादा ऑफिस हैं।

दो मालिक हे आपस में नहीं पटती थी दोनों की
सर्जि ब्रिन और लैरी पेज 22-23 साल के थे, जब 1995 में वे पहली बार मिले। उस समय दोनों के बीच बिल्कुल नहीं पटती थी। हर बात पर बहस हो जाया करती थी। दोनों के माता-पिता बेहद पढ़े-लिखे टैक्नोक्रेट्स थे।

मिलकर बनाई सर्च मशीन
लैरी और सर्जि को दोस्त बनाया एक समस्या ने। वह थी इंटरनेट जैसे सूचनाओं के महासागर में से किसी खा़स सूचना को कैसे ढूंढ़ा जाए? दोनों ने मिल कर एक सर्च-मशीन बनाई, एक ऐसा कम्प्यूटर, जो कुछ निश्चित सिद्धांतों और नियमों के अनुसार किसी सूचना भंडार में से ठीक वही जानकारी ढूंढकर निकाले, जो हम चाहते हैं। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में ही किए परीक्षण- बुनियादी सिद्धांत ये था कि हाइपर लिंकिंग की मदद से किसी वेबसाइट को सर्च किए टर्म के हिसाब से इंटरनेट से खोजकर एक समझने योग्य सूची बनानी है। यूजर जिस भी शब्द, प्रश्न या आर्टिकल को सर्च करे, कम्प्यूटर उसके बारे में जितनी हो सके, संबंधित जानकारी यूजर्स के सामने पेश कर दे। ये एक ऐसी गुत्थी थी जिसे लैरी पेज और सर्जि ब्रिन ने मिलकर सुलझाया। दोनों ही प्रोफेशनल दोस्तों ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में ही आरंभिक परीक्षण किए। इसके लिए 11 लाख डॉलर धन जुटाया। लैरी पेज ने सबसे पहले वर्ल्ड वाइड वेब की मैथेमैटिकल प्रॉपर्टीज को समझने की कोशिश की। लैरी पेज ने इंटरनेट का हाइपरलिंक स्ट्रक्चर एक ग्राफ की मदद से समझा। इसके बाद लैरी पेज ने सर्जि ब्रिन के साथ एक रिसर्च प्रोजेक्ट ‘BackRub’ के साथ जुड़कर काम करना शुरू किया। दोनों दोस्तों ने एक साथ कई प्रोजेक्ट किए और अंत में 4 सितंबर, 1998 में इन दोनों ने मिलकर कंपनी की नींव रखी।

कार-गैरेज में बनी गूगल इनकॉपरेटेड
दोनों ने 7 सितंबर 1998 को, गूगल इनकॉपरेटेड के नाम से मेनलो पार्क, कैलिफोर्निया के एक कार गैरेज में अपनी कंपनी बनाई और काम शुरू कर दिया। दो ही वर्षों में गूगल का नाम सबकी जुबान पर था। जर्मनी में कम्प्यूटर विज्ञान के प्रोफेसर डिर्क लेवान्दोस्की का मत है कि याहू जैसे अपने अन्य प्रतियोगियों की तुलना में गूगल शायद ही बेहतर है, लेकिन उसकी सार्वजनिक छवि कहीं अच्छी बन गई है।

सितंबर 2007 में गूगल ने पूरा किया अपना पहला दशक
यही उसकी चमत्कारिक सफलता का रहस्य है। इंटरनेट को दुनिया में आए दो दशक से ज्यादा समय हो गए हैं, जबकि गूगल ने सितंबर 2007 को अपना पहला दशक पूरा किया, तब भी दोनों एक-दूसरे के पर्याय बन गए हैं।

इस्तेमाल बढ़ने के साथ-साथ बढ़ते चले गए शेयर के दाम
इंटरनेट का इस्तेमाल जितना बढ़ रहा है, गूगल के शेयर भी उतने ही चढ़ रहे हैं। अगस्त 2004 में गूगल ने जब पहली बार शेयर बाज़ार में पैर रखा, तब उसके शेयर 85 डॉलर में बिक रहे थे। तीन वर्ष बाद, नवंबर 2007 में इसके शेयर उछलकर 747 डॉलर पर पहुंच गए थे।

from Tumblr https://ift.tt/2GWnrW4
via IFTTT

Did you know today is World Idli Day? Twitterati are going…

Did you know today is World Idli Day?

Twitterati are going crazy celebrating the day and the pictures will make you want to order a plate of idlis right away!

What better than starting World Idli Day with a plateful of idlis – the soft and fluffy round steamed savoury cake – served usually with a bowl of piping hot sambar and tangy coconut chutney.

WHY MARCH 30 IS CELEBRATED AS WORLD IDLI DAY

According to Google reports, Chennai man Iniyavan, regarded as ‘Idli King’ and the president of Tamil Nadu Catering Employees Union, Rajamani Iyer, apparently came up with the concept of a special day for idlis. March 30 has officially been chosen as World Idli Day.

ORIGIN OF IDLIS

The origin of idlis, however, is a topic of debate.

“Both Tamil Nadu and Karnataka claim to have invented this recipe. There are references to the making and existence of idli from the 8th century,” Sujan Mukherjee, the executive chef at Chennai’s Taj Coromandel Hotel, had told PTI in an interview.

“But many of us will be surprised to know there are claims that idli did not originate in South India at all. Some food historians believe idli was derived from some steamed rice preparations from Indonesia. It is believed that this recipe was invented by the cooks of the Hindu kings who ruled some parts of Indonesia,“ he told PTI.

The second claim contradicts this, as some food historians claim that idli was introduced to South India by Arab traders, who had been in constant contact with the southern coast.

“There are works that mention about a flat boiled rice preparation that had a bland coconut paste and this preparation was developed upon by the locals to the present- day idli and coconut chutney,” Mukherjee told PTI.

TYPES OF IDLIS

The idli comes in a lot of variations and adaptations throughout the world. Some of the classical varieties are – Kanchipuram idli (tempered with black pepper and coconut) and Ramasserry idli (a flat and soft idly from Palakkad in Kerala). “There are modern-day adaptations like mallipoo idli and podi idli. Mallipoo in Tamil refers to jasmine, the idli gets its name as it is as soft as a jasmine. The podi idlis are mini idlis tossed with gun powder (ground chilly),” Mukherjee said. There are also household adaptations like sambar idli (idli immersed in sambar) and idli upma (tempered idli cubes with chopped onions and chilies). All the idlis are prepared by steaming method but in a few snack preparations they are fried after steaming.

from Tumblr https://ift.tt/2pQkjUh
via IFTTT

द्धितीय विश्व युद्ध

1. द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत 1 सितंबर 1939 को हुई।

2. इसका तत्कालिक कारण जर्मनी द्वारा पोलैंड पर आक्रमण था।

3. यह युद्ध 6 वर्षों तक चलता रहा, 14 अगस्त 1945 को जापान के आत्मसमर्पण के बाद यह युद्ध बंद हुआ।

4. इस युद्ध मेँ 62 देशो ने भाग लिया।

5. इस युद्ध मेँ एक ओर सोवियत रुस, इंग्लैंड, फ्रांस, अमेरिका चीन तथा अन्य राष्ट्र थे। इन्हें मित्र राष्ट्र कहा जाता था।

6. दूसरी ओर जर्मनी जापान तथा इटली थे, जिन्हें धुरी राष्ट्र कहा जाता था।

7. संयुक्त राज्य अमेरिका प्रारंभ मेँ तटस्थ था, लेकिन जापान द्वारा 7 सितंबर 1941 को पर्ल हार्बर पर आक्रमण किए जाने के बाद वह मित्र राष्ट्रोँ की तरफ से युद्ध करने लगा।

8. द्वितीय विश्व युद्ध के समय इंग्लैंड के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल अमेरिका के राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रुज़वेल्ट थे।

9. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने 6 अगस्त, 1945 को जापान के हिरोशिमा शहर पर फैटमैन नामक परमाणु बम गिराया।

10. 9 अगस्त 1945 को जापान के नागासाकी शहर पर अमेरिका ने लिटिल बॉय नामक परमाणु बम गिराया।

11. द्वितीय विश्व युद्ध में मित्र राष्ट्र द्वारा पराजित होने वाला अंतिम देश जापान था।

12. अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र मेँ द्वितीय विश्व का सबसे बडा योगदान संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) की स्थापना था।

from Tumblr https://ift.tt/2J8fL3S
via IFTTT

प्रथम विश्व युद्ध

1. प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत 28 जुलाई 1914 ई. को इसका तात्कालिक कारण आस्ट्रिया के राजकुमार फर्डिनेंड की बोस्निया की राजधानी सराजेवो मेँ की गई हत्या थी।

2. यह युद्ध 4 वर्षो अर्थात 1918 तक चला। इसमेँ 37 देशों ने भाग लिया।

3. प्रथम विश्व युद्ध मेँ संपूर्ण विश्व दो भागोँ मेँ बंटा था – मित्र राष्ट्र एवं धुरी राष्ट्र।

4. धुरी राष्ट्रोँ का नेतृत्व जर्मनी ने किया। इसमेँ शामिल अन्य देश थे – ऑस्ट्रिया, हंगरी, तुर्की, इटली आदि।

5. मित्र राष्ट्रोँ मेँ इंग्लैण्ड, फ्रांस, रुस, जापान तथा संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देश शामिल थे।

6. इटली बाद मेँ धुरी राष्ट्रोँ से अलग होकर मित्र राष्ट्र की तरफ जा मिला।

7. क्रांति के बाद रुस युद्ध से अलग हो गया।

8. संयुक्त राज्य अमेरिका प्रारंभ मेँ तटस्थ था, लेकिन जर्मनी द्वारा ब्रिटेन के लूसीतोनिया जहाज डुबोने तथा अमेरिकी जहाजों को ढूढने के बाद वह मित्र राष्ट्रोँ की तरफ से युद्ध मेँ उतरा।

9. लूसीतोनिया जहाज डूबने वालोँ मेँ अमेरिकियों की संख्या अधिक थी।

10. प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति 11 नवंबर 1918 को हुई।

11. 18 जून, 1918 को पेरिस मेँ शांति सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें 27 देशों के नेताओं ने भाग लिया।

12. पेरिस, शांति सम्मेलन मेँ अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरों विल्सन ब्रिटेन के प्रधानमंत्री लॉयड जॉर्ज तथा फ्रांस के प्रधानमंत्री जॉर्ज कलीमेन्शु की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

13. मित्र राष्ट्रों ने जर्मनी के साथ वर्साय की संधि, ऑस्ट्रिया के साथ सेंट जर्मेन की संधि, बुलगारिया के साथ न्यूली की संधि, हंगरी के साथ त्रिआनों की संधि तथा तुर्की के साथ सेब्रे की संधि की।

14. मित्र राष्ट्रों ने पराजित जर्मनी के साथ काफी अन्यायपूर्ण वर्साय की संधि की थी, जिसके कारण पूरे विश्व को 20 वर्ष बाद पुनः पुणे एक और विश्वयुद्ध मेँ उलझना पड़ा।

15. युद्धोपरांत विश्व मेँ शांति स्थापना के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था राष्ट्र संघ या लीग ऑफ नेशंस की स्थापना 1920 मेँ की गई।

from Tumblr https://ift.tt/2pNOryS
via IFTTT