सफलता का रास्ता बना बनाया नहीं मिलता, स्वंय बनाना पड़ता है। जिसने…

सफलता का रास्ता बना बनाया नहीं मिलता, स्वंय बनाना पड़ता है। जिसने जैसा मार्ग बनाया, उसे वैसी ही मंजिल मिलती है।
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#iamrahul #IamRahulJha #rahul #rahuljha #RAHULJHANOIDA (at Noida नोएडा)

May 21, 2018 at 08:08PM #iamrahuljha #rahul #rahuljha #rahuljhanoida

वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को…

वट सावित्री व्रत

ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को महिलाएं वट सावित्री व्रत रखती हैं। इस बार यह 15 मई 2018 (मंगलवार) को है। वट सावित्री के व्रत को कुमारी, विवाहिता, कुपुत्रा, सुपुत्रा सभी करतीं हैं। इस दिन वाट #वृक्ष (बरगद) का पूजन किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। वट सावित्री व्रत को करने से संतान प्राप्ति की #कामना भी पूरी होती है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि पूर्वक वट सावित्री व्रत और पूजन से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति सहित संतान की कामना भी पूरी होती है।

तो इसलिए होती हैं वट वृक्ष की पूजा

कहा जाता है कि इसी दिन #सावित्री ने #यमराज से अपने पति #सत्यवान के प्राणों की रक्षा की थी। यमराज ने चने के रूप में सत्यवान के प्राण सौंपे थे। चने लेकर सावित्री सत्यवान के शव के पास आयी और मुंह में रखकर सत्यवान के मुंह में फूंक दिया। इसी से सत्यवान जीवित हो गये। तभी से वट सावित्री के पूजन में चना पूजन का नियम है। वट वृक्ष को दूध और जल से सींचना चाहिए।

ये है मान्यता 

जेष्ठ मास के कृष्ण पक्ष के श्रावण को विवाहित महिलाओं द्वारा वट सावित्री व्रत रखा जाता है। इसकी पूजा बरगद वृक्ष के नीचे की जाती है इससे इसका नाम वट सावित्री के नाम से जाना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार पीपल वृक्ष की तरह बरगद वृक्ष में भी लक्ष्मी महेश की उपस्थिति मानी जाती है। इस वट वृक्ष के नीचे कथा व्रत करने से मन वांछित फल की प्राप्ति होती है। 

पूजा के लिए सुबह तीन बजे से ही सुहागिनें सोलह श्रृंगार करने लगतीं हैं। फिर वट वृक्ष के नीचे जाकर पांच, ग्यारह, इक्कीस, इक्यावन व #108 बार वृक्ष की परिक्रमा करके वट में धागा लपेट कर पति की लम्बी आयु की मुरादें मागतीं हैं।

इन चीजों के बिना अधूरी है पुजा

ज्येष्ठ कृष्णपक्ष की अमावस्या को #वट #सावित्री. #व्रत किया जाता है। इस दिन वाट वृक्ष (बरगद) का पूजन किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से #अखंड #सौभाग्य की प्राप्ति होती है। मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को करने वाली स्त्री के पति पर आने वाल हर संकट दूर हो जाता है। शास्त्रों के अनुसार वट #सावित्री व्रत को में पूजन सामग्री विशेष महत्व रखता है। ऐसा माना जाता है कि बिना #पूजन सामग्री यह व्रत का अधूरा रह जाता है।

वट सावित्री पूजन सामग्री 

सत्यवान-सावित्री की मूर्ति, बांस का पंखा, लाल धागा, धूप, मिट्टी का दीपक,घी,फूल, फल (आम, लीची और अन्य फल), कपड़ा 1.25 मीटर का दो, सिंदूर, जल से भरा हुआ पात्र, रोली 
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ऐसे करें पूजा

#vatSavitriPuja

वट सावित्री की पूजा के लिए विवाहित महिलाओं को बरगद के पेड़ के नीचे पूजा करनी होती है। सुबह स्नान करके #दुल्हन की तरह सजकर एक थाली में प्रसाद जिसमे गुड़, भीगे हुए चने, आटे से बनी हुई मिठाई, कुमकुम, रोली, मोली, 5 प्रकार के फल, पान का पत्ता, धुप, घी का दीया, एक लोटे में जल और एक हाथ का पंखा लेकर बरगद पेड़ के नीचे जाएं। और पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएं, उसके बाद प्रसाद चढाकर धुप, दीपक जलाएं। उसके बाद सच्चे मन से पूजा करके अपने पति के लिए लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें। पंखे से वट वृक्ष को हवा करें और सावित्री माँ से #आशीर्वाद लें ताकि आपका #पति दीर्घायु हो। इसके बाद बरगद के पेड़ के चारो ओर कच्चे धागे से या मोली को 7 बार बांधे और प्रार्थना करें। #घर आकर जल से अपने पति के पैर धोएं और आशीर्वाद लें। उसके बाद अपना #व्रत खोल सकते है।

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©livehindustan

May 15, 2018 at 09:03AM #iamrahuljha #rahul #rahuljha #rahuljhanoida

मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं इस अवसर पर डॉ जगदीश व्योम…

मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

इस अवसर पर डॉ जगदीश व्योम द्वारा लिखित कविता आपके सामने प्रस्तुत है

माँ कबीर की साखी जैसी
तुलसी की चौपाई-सी
माँ मीरा की पदावली-सी
माँ है ललित रुबाई-सी।

माँ वेदों की मूल चेतना
माँ गीता की वाणी-सी
माँ त्रिपिटिक के सिद्ध सूक्त-सी
लोकोक्तर कल्याणी-सी।

माँ द्वारे की तुलसी जैसी
माँ बरगद की छाया-सी
माँ कविता की सहज वेदना
महाकाव्य की काया-सी।

माँ अषाढ़ की पहली वर्षा
सावन की पुरवाई-सी
माँ बसन्त की सुरभि सरीखी
बगिया की अमराई-सी।

माँ यमुना की स्याम लहर-सी
रेवा की गहराई-सी
माँ गंगा की निर्मल धारा
गोमुख की ऊँचाई-सी।

माँ ममता का मानसरोवर
हिमगिरि-सा विश्वास है
माँ श्रद्धा की आदि शक्ति-सी
कावा है कैलाश है।

माँ धरती की हरी दूब-सी
माँ केशर की क्यारी है
पूरी सृष्टि निछावर जिस पर
माँ की छवि ही न्यारी है।

माँ धरती के धैर्य सरीखी
माँ ममता की खान है
माँ की उपमा केवल है
माँ सचमुच भगवान है।

–  जगदीश व्योम
@jagdishvyom

#mothersday

#tumblr
(at Uttar Pradesh)

May 13, 2018 at 10:49AM #iamrahuljha #rahul #rahuljha #rahuljhanoida

विश्व हास्य दिवस ( #worldLaughterDay) हँसी जीवन का प्रभात है,…

विश्व हास्य दिवस ( #worldLaughterDay)

हँसी जीवन का प्रभात है, यह शीतकाल की मधुर धूप है तो ग्रीष्म की तपती दुपहरी में सघन छाया। हँसने से आत्मा खिल उठती है। इससे आप तो आनंद पाते ही हैं दूसरों को भी आनंदित करते हैं। हास-परिहास पीड़ा का दुश्मन है, निराशा और चिंता का अचूक इलाज और दुःखों के लिए रामबाण औषधि है।

शरीर में पेट और छाती के बीच में एक डायफ्राम होता है, जो हँसते समय धुकधुकी का कार्य करता है। फलस्वरूप पेट, फेफड़े और यकृत की मालिश हो जाती है। हँसने से ऑक्सीजन का संचार अधिक होता है व दूषित वायु बाहर निकलती है। नियमित रूप से खुलकर हँसना शरीर के सभी अवयवों को ताकतवर और पुष्ट करता है व शरीर में रक्त संचार की गति बढ़ जाती है तथा पाचन तंत्र अधिक कुशलता से कार्य करता है।

लखनऊ के रेलवे स्टेशन से आदमी बाहर निकलता है तो बड़े अक्षरों में लिखे बोर्ड पर नजर टिकती है- ‘मुस्कुराइए कि आप लखनऊ में हैं’। यह वाक्य पढ़ते ही यात्रियों के चेहरे पर मुस्कुराहट फैल जाती है। इस एक वाक्य में लखनऊ की जिंदादिली व खुशमिजाजी के दर्शन होते हैं। हँसना एक मानवीय लक्षण है, सृष्टि का कोई भी जीवधारी नहीं हँसता लेकिन एक हम मनुष्य ही हँसने वाले प्राणी हैं, जीवन में निरोगी रहने के लिए हमेशा मुस्कुराते रहना चाहिए। खाना खाते समय मुस्कुराइए, आपको महसूस होगा कि खाना अब अधिक स्वादिष्ट लग रहा है।

थैकर एवं शेक्सपियर जैसे विचारकों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि प्रसन्नचित व्यक्ति अधिक जीता है। मनुष्य की आत्मा की संतुष्टि, शारीरिक स्वस्थता व बुद्धि की स्थिरता को नापने का एक पैमाना है और वह है चेहरे पर खिली प्रसन्नता।

हँसने के लाभ

शरीर में पेट और छाती के बीच में एक डायफ्राम होता है, जो हँसते समय धुकधुकी का कार्य करता है। फलस्वरूप पेट, फेफड़े और यकृत की मालिश हो जाती है। हँसने से ऑक्सीजन का संचार अधिक होता है व दूषित वायु बाहर निकलती है। नियमित रूप से खुलकर हँसना शरीर के सभी अवयवों को ताकतवर और पुष्ट करता है व शरीर में रक्त संचार की गति बढ़ जाती है तथा पाचन तंत्र अधिक कुशलता से कार्य करता है। जोर से कहकहे लगाने से पूरे शरीर में प्रत्येक अंग को गति मिलती है, फलस्वरूप शरीर में मौजूद एंडोफ्राइन ग्रंथि (हारमोन दाता प्रणाली) सुचारु रूप से चलने लगती है, जो कि कई रोगों से छुटकारा दिलाने में सहायक है।

मनोवैज्ञानिक प्रयोगों से यह स्पष्ट हुआ है कि अधिक हँसने वाले बच्चे अधिक बुद्धिमान होते हैं। हँसना सभी के शारीरिक व मानसिक विकास में अत्यंत सहायक है। जापान के लोग अपने बच्चों को प्रारंभ से ही हँसते रहने की शिक्षा देते हैं।

दुनिया में सुख एवं दुःख दोनों ही धूप-छाँव की भाँति आते-जाते हैं। यदि मनुष्य दोनों परिस्थितियों में हँसमुख रहे तो उसका मन सदैव काबू में रहता है व वह चिंता से बचा रह सकता है। आज के इस तनावपूर्ण वातावरण में व्यक्ति अपनी मुस्कुराहट व हँसी को भूलता जा रहा है,फलस्वरूप तनावजन्य बीमारियाँ जैसे- उच्च रक्तचाप, शुगर, माइग्रेन, हिस्टीरिया, पागलपन, डिप्रेशन आदि बहुत-सी बीमारियों को निमंत्रण दे रहा है।

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May 06, 2018 at 11:44AM #iamrahuljha #rahul #rahuljha #rahuljhanoida

#worldLabourDay हर इमारत की नींव हैं अमीरों की तक़दीर हैं खून…

#worldLabourDay

हर इमारत की नींव हैं अमीरों की तक़दीर हैं खून पसीना बहाकर अपना 
पूरा करते वो अमीरों का सपना 
दो वक्त की उसे मिले ना मिले 
पर उसी के हाथो करोड़ो की तक़दीर लिखे 
माना उसकी किस्मत हैं अभी नहीं हैं एशो आराम 
पर उसको ना भुलाना तुम 
ना बनाना बैगाना तुम 
देना उसे उसका हक़ 
मजदूर हैं वह मेहनती शख्स

मजदूर दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं (1 मई)
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May 01, 2018 at 04:13PM